बिहारशरीफ :- मोहम्मद हमज़ा अस्थानवी जितनी बड़ी सख्शियत,लिखना उतना ही मुश्किल।डर इस बात की कहीं लिखने में कुछ गलत न हो जाए।जिनकी सात सौ साल पहले कही गयी बातों व उनके द्वारा लिखा गया साहित्य फिजिक्स की थ्योरी बन जाए, जिनके साहित्य पर आधारित विश्वस्तरीय सम्मलेन हुआ हो,जिन्हें ईरान में पर्सियन का दूसरा सबसे बड़ा साहित्यकार माना जाता हो,जिनका साहित्य वाशिंगटन में सात एडिशन में प्रकाशित हो वैसे व्यक्तित्व की चर्चा करना सुखद अनुभूति का अहसास कराता है,जी हाँ,मैं बात कर रहा हूँ बिहार में सुफीबाद व इस्लामी इतिहास के सशक्त हस्ताक्षर हज़रत मखदुमें जहाँ शेख शरफुद्दीन अहमद यहया मनेरी की।जो सूफीवाद व इस्लामी इतिहास के सशक्त हस्ताक्षर हजरत मखदुमे जहां शेख शरफुद्दीन अहमद यहया मनेरी के बारे में जितना लिखी जाये कम है। मखदुमे जहां का जन्म 1263 ई. में पटना जिले के मनेरशरीफ में हुआ। इनके पिता का नाम हजरत मखदुम कमालुद्दीन यहया मनेरी था, वे भी सूफी संत थे। मां का नाम बीबी रजिया था। मखदुमे जहां ने अपनी मौलिक शिक्षा प्राप्त कर राजगीर और बिहिया के जंगलों में घोर तपस्या की तथा बिहारशरीफ के खानकाह मोहल्ले म...
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